ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 28 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 28 मार्च 2026_
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *
दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी*
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 08:46 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुष्य 02:50 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। पुष्य नक्षत्र के मुख्य देवता देवगुरु बृहस्पति (बृहस्पति देव) हैं।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 08:05 PM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण – गर 08:46 AM तक
द्वितीय करण – वणिज 08:13 PM तक, बाद विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:03:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:29 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:06 ए एम से 06:16 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:35 पी एम से 06:59 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:37 पी एम से 07:47 पी एम
💧 अमृत काल : 08:35 ए एम से 10:09 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, मार्च 29 से 12:49 ए एम, मार्च 29
❄️ रवि योग : 06:16 ए एम से 02:50 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ गण्ड मूल/ रवि योग/ विडाल योग/ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल स्मृति दिवस, सिखों के गुरु गुरु हरगोविंद सिंह जी पुण्यतिथि, भारतीय दार्शनिक वेथाथिरी महर्षि स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेटर अनमोलप्रीत सिंह जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय महिला संगीत दिवस, अर्थ आवर, बार्नम एंड बेली दिवस, राष्ट्रीय ट्राइग्लिसराइड्स दिवस, वर्चुअल एडवोकेसी दिवस, चित्तूर वी. नागैया जयन्ती, वीना मजूमदार जन्म दिवस, मुनमुन सेन जयन्ती, स्वाति पीरामल जयन्ती, सुंदर शास्त्री सत्यमूर्ति पुण्य तिथि, कावसजी जमशेदजी पेटिगारा पुण्य तिथि, राष्ट्रीय गांजा प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय खरपतवार संरक्षण दिवसराष्ट्रीय नौवहन दिवस।
✍🏼 *तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है। ⛲ *_Vastu tips* 🗽
वास्तु शास्त्र में जाने आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार मटका रखने के लिए सबसे उचित दिशा उत्तर दिशा है। उत्तर दिशा का संबंध जल तत्व से है। घर में जल तत्व को संतुलित करने के लिए इस दिशा में पानी रखने से धन, स्वास्थ्य और घर में शांति बनी रहती है।
*कार्यालय और सार्वजनिक स्थान अगर आप ऑफिस या सार्वजनिक जगह पर मटका रखते हैं, तो इसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इससे कामकाज में स्थिरता और सकारात्मक वातावरण मिलता है। *सकारात्मक ऊर्जा का संचार घर में सही दिशा में रखा मटका न केवल वास्तु दोष को कम करता है बल्कि घर में सुख-शांति और बेहतर ऊर्जा का संचार भी लाता है। पानी के घड़ेको नियमित साफ करें और इसमें हमेशा ताजा पानी भरें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
भय और मानसिक तनाव से मुक्ति
*
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में चिंता और तनाव आम है। हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से मन शांत होता है और अज्ञात भय (जैसे अंधेरे का डर, असफलता का डर या शत्रुओं का भय) समाप्त हो जाता है।
*बड़े संकटों का निवारण हनुमान अष्टक की हर चौपाई में हनुमान जी द्वारा देवताओं के संकट दूर करने का वर्णन है। ऐसी मान्यता है कि जब इंसान चारों तरफ से मुसीबतों से घिर जाए और उसे कोई रास्ता न सूझे, तब इसका पाठ “रामबाण” की तरह काम करता है। *ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव में कमी विशेष रूप से शनि देव की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए हनुमान अष्टक का पाठ बहुत फलदायी माना जाता है। हनुमान जी के भक्तों पर शनि देव की टेढ़ी दृष्टि का प्रभाव कम हो जाता है।
*आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि हनुमान जी बल, बुद्धि और विद्या के सागर हैं। उनके गुणों का गान करने से व्यक्ति के भीतर सोई हुई ऊर्जा जागृत होती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और कठिन कार्यों को करने का साहस मिलता है। *बच्चों के लिए लाभकारी यदि बच्चों को बुरे सपने आते हों या उनका मन पढ़ाई में न लगता हो, तो उन्हें हनुमान अष्टक सुनने या पढ़ने की सलाह दी जाती है। इससे उनकी एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।
🫁 *आरोग्य संजीवनी* 🦻🏼
ठीक हो सकता है बहरापन यह रहें अचूक उपाय
👉🏻कारण :
*यह शरीर की कमजोरी या नसों की खराबी के कारण होता है। कान में बहुत तेज *आवाज पहुंचना, सर्दी लगना, सिर में या दिमाग में चोट लगना, नसों की कमजोरी, नहाते समय कान के बिल्कुल अन्दर तक पानी का चले जाना, कान के अन्दर बहुत ज्यादा मैल का जमा हो जाना, कान का बहना, दिमाग या गले की बीमारी, लकवा, टाइफाइड, मलेरिया, जुकाम का बार-बार होना आदि कारणों से यह रोग हो सकता है।
*✔पहला प्रयोगः दशमूल, अखरोट अथवा कड़वी बादाम के तेल की बूँदें कान में डालने से बहरेपन में लाभ होता है। *✔दूसरा प्रयोगः ताजे गोमूत्र में एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर हर रोज कान में डालने से आठ दिनों में ही बहरेपन में फायदा होता है।
*✔तीसरा प्रयोगः आकड़े के पके हुए पीले पत्ते को साफ करके उस पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करके उसका रस निकालकर दो-तीन बूँद हररोज सुबह-शाम कान में डालने से बहरेपन में फायदा होता है। *✔चौथा प्रयोगः करेले के बीज और उतना ही काला जीरा मिलाकर पानी में पीसकर उसका रस दो-तीन बूँद दिन में दो बार कान में डालने से बहरेपन में फायदा होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
बहुत समय पहले की बात है। स्वर्ग लोक में एक सुंदर और तेजस्वी अप्सरा रहती थीं—अंजना। वे नृत्य और सौंदर्य में अद्वितीय थीं, लेकिन एक बार एक ऋषि के श्राप के कारण उन्हें पृथ्वी पर वानरी रूप में जन्म लेना पड़ा। यह उनके जीवन का कठिन समय था, परंतु उन्होंने इसे भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार कर लिया।
*पृथ्वी पर अंजना ने वानरराज केसरी से विवाह किया। केसरी एक वीर, धर्मात्मा और पराक्रमी राजा थे। अंजना और केसरी दोनों ही भगवान शिव के परम भक्त थे। संतान प्राप्ति की इच्छा से अंजना ने कठोर तपस्या शुरू की। उन्होंने वर्षों तक जंगल में रहकर भगवान शिव की आराधना की। *उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा, “हे अंजना! तुम्हें एक ऐसा पुत्र प्राप्त होगा जो मेरी ही अंश से जन्म लेगा और संसार में महान कार्य करेगा।” उसी समय वायु देव ने भी अपनी दिव्य शक्ति से उस आशीर्वाद को अंजना तक पहुँचाया।
*कुछ समय बाद अंजना ने एक दिव्य बालक को जन्म दिया—हनुमान। जन्म लेते ही बालक हनुमान अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली थे। उनके भीतर अपार बल और अद्भुत ऊर्जा थी। एक दिन बालक हनुमान ने आकाश में चमकते सूर्य को फल समझकर निगलने के लिए छलांग लगा दी। उनकी इस बाल लीला से देवता भी चकित रह गए। *धीरे-धीरे हनुमान बड़े हुए और उन्होंने अपने पराक्रम, बुद्धि और भक्ति से सभी का मन जीत लिया। वे भगवान राम के परम भक्त बने और उनके कार्यों में सबसे बड़े सहायक सिद्ध हुए।
*अंजना अपने पुत्र को देखकर गर्व से भर उठती थीं। उनका जीवन, जो कभी श्राप से बंधा था, अब एक महान वरदान बन चुका था। यही कारण है कि हनुमान जी को “अंजनानंदन” और “अंजनेय” कहा जाता है—अर्थात अंजना के प्रिय पुत्र। 👉🏼 *यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और धैर्य से हर कठिनाई भी वरदान में बदल सकती है।
जय श्री हनुमान ✨🌺
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दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
*_दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।

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