आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 13 अगस्त 2024
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 09:31 AM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 10:44 AM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र का स्वामी गुरू है। विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 04:33 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
⚡ प्रथम करण : बव – 09:31 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 10:03 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:31:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:29:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:23 ए एम से 05:06 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:45 ए एम से 05:49 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:52 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:38 पी एम से 03:31 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:02 पी एम से 07:24 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:02 पी एम से 08:07 पी एम
💧 अमृत काल : 01:10 ए एम, अगस्त 14 से 02:52 ए एम, अगस्त 14
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, अगस्त 14 से 12:48 ए एम, अगस्त 14
❄️ रवि योग : 10:44 ए एम से 05:50 ए एम, अगस्त 14
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में पंचमुखा दीपक प्रज्वलित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवियोग/ दुर्गाष्टमी/ दुर्वाष्टमी/ तिशाबी आव (ज्यु – यहूदी), राष्ट्रीय फ़िले मिग्नॉन दिवस है, अंतर्राष्ट्रीय लेफ्टहैंडर्स दिवस, राष्ट्रीय प्रोसेको दिवस, दोपहर की चाय सप्ताह, राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह, अंतर्राष्ट्रीय बाएं हाथ वालों का दिवस, नेशनल प्रोसेको डे, नेशनल फ़िलेट मिग्नॉन डे, नेशनल लेफ्ट हैंडर्स डे, विश्व अंगदान दिवस, राष्ट्रीय सेना संग्रहालय दिवस, भागवत विद्वान पंडित काशीनाथशास्त्री जोशी जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय वामपंथी दिवस
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips_ 🏚️
सही दिशा में सोने के लाभ:
स्वास्थ्य सुधार: बेड की दिशा का ध्यान रखना आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। यदि आप दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर पैर करके सोते हैं, तो यह स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
शांति और सुख: सही दिशा में सोने से मानसिक शांति और सुख-शांति प्राप्त होती है। सही दिशा में सोने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और आप अधिक ताजगी महसूस करते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा: सही दिशा में सोने से आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इससे परिवार में खुशहाली और करियर में उन्नति के अवसर भी प्राप्त होते हैं।
सही दिशा:
उत्तर दिशा: सिर की दिशा उत्तर और पैर की दिशा दक्षिण होनी चाहिए। यह दिशा सोने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
पूर्व दिशा: सिर की दिशा पूर्व और पैर की दिशा पश्चिम भी शुभ मानी जाती है। यह दिशा भी मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
बेहतर परिणाम के लिए: अपने बेड की दिशा को बदलकर सही दिशा में सोने की आदत डालें। इससे आप न केवल बेहतर नींद पा सकेंगे, बल्कि आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आएंगे।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नमक क्यों: अधिक नमक खाने से शरीर में पानी बरकरार रहता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।किसमें होता है: प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, नमक, अचार आदि में नमक की मात्रा अधिक होती है।
पोटेशियम क्यों: किडनी के मरीजों में पोटेशियम को बाहर निकालने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे शरीर में पोटेशियम का स्तर बढ़ सकता है।किसमें होता है: केले, संतरे, आलू, टमाटर आदि में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है।
फास्फोरस क्यों: अधिक फास्फोरस हड्डियों को कमजोर कर सकता है और किडनी की समस्याओं को बढ़ा सकता है।
किसमें होता है: मांस, मछली, डेयरी उत्पाद, नट्स आदि में फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है।
प्रोटीन क्यों: अधिक प्रोटीन खाने से किडनी को अधिक काम करना पड़ता है, जिससे यह खराब हो सकती है।
किसमें होता है: मांस, मछली, अंडे, दालें आदि में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।
🫘 आरोग्य संजीवनी 🌰
मुलेठी शीत, स्वाद में मधुर, तीनों दोषों का शमन करनेवाली, आँखों और बालों के लिए हितकर, बलकारक, स्वर और त्वचा के वर्ण में सुधार लानेवाली, वीर्यजनक है।
इस में कफशामक और कफनिःसारक गुण होने के कारण इसका मुख्य उपयोग खांसी, अस्थमा, गले में खराश, ब्रोंकाइटिस जैसे श्वसन मार्ग के व्याधियों में होता है।मुलेठी का काढ़ा पीना या इस के जड़ के छोटे टुकड़े मुँह में रखकर चूसना फायदेमंद होता है।
अम्लपित्त या एसिडिटी में यह अपने पित्त शामक गुण के कारण उपयोगी है। वरण रोपक होने के कारण यह अल्सर के व्रणों को भरने में मदत करती है।
शीत और एंटी माइक्रोबियल होने से यह मूत्रमार्ग के संक्रमणों में लाभदायक है। पेशाब में होनेवाली जलन को दूर करती है।
इस के कार्यकारी तत्व ग्लाइसीर्रिज़िन में यकृत रक्षक गतिविधि होती है। इस कारण मुलेठी हेपेटाइटिस जैसे यकृत या लिवर की बीमारियों में उपयोगी है।
🌷 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
सरवर नीर की कहानी
बहुत समय पहले जब सतयुग का समय चल रहा था। तब एक राज्य में एक राजा रहा करता था। राजा बहुत ही बुद्धिमानी और शक्तिशाली था, जिससे आसपास के राजा उसके राज्य की तरफ आंख उठाकर नहीं देखते थे। इसके साथ-साथ राजा बहुत दानवीर भी था। राजा यम हमेशा से ब्राह्मणों को बहुत सारा दान दिया करते थे। इस राजा का नाम यम था।
राजा के राज्य में सभी लोग बहुत ही खुशी-खुशी रहा करते थे और राजा यम के राज्य को चलाने के तौर तरीके से बहुत खुश थे। सभी लोग राजा यम की बहुत प्रशंसा किया करते थे। राजा यम राज्य मे सभी लोग आपस में मिल जुल कर रहा करते थे। राजा यम ने अपना विवाह एक बहुत ही अमीर देश की रानी अमली से किया था।
राजा अपनी पत्नी अमली को बहुत प्यार करते थे और उनको किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते थे। जिसके बाद राजा यम और रानी अमली ने दो बेटों को जन्म दिया था, उन्होंने अपने एक बेटे का नाम सरवन और दूसरे बेटे का नाम नीर रखा था। राजा यम और उसकी पत्नी अमली अपने बेटों से बहुत प्रेम करते थे।
राजा ने अपने बेटे सरवर और नीर का पालन पोषण बहुत ही अच्छे ढंग से किया था। उनको बहुत अच्छे अच्छे संस्कार दिए थे। राजा अपने पूरे परिवार के साथ राज्य में बहुत ही शान और शौकत के साथ रहा करता था। राजा हम अपने परिवार के साथ बहुत खुश थे और अपने राजधर्म का भी पालन बहुत अच्छे से कर रहे थे।
जब राजा यम एक बार अपने दरबार में बैठकर राजा होने के अपने सारे नियमों का पालन कर रहे थे तभी अचानक से वहां पर एक गेरुआ रंग के कपड़े पहनकर एक ब्राह्मण राजा यम के दरबार में आया। राजा ने उस ब्राह्मण का स्वागत किया और उनको अपने महल में ले गया। राजा ने उस ब्राह्मण का आदर सत्कार बहुत अच्छे ढंग से किया और उनको बहुत से अच्छे अच्छे स्वादिष्ट व्यंजन बनवाकर खिलाएं।
जिसके बाद उस ब्राह्मण ने राजा यम की परीक्षा लेने के लिए राजा यम से तीन वचन मांगे और उस ब्राह्मण ने राजा यम से उनका पूरा राज्य दान में मांग लिया। राजा यम बहुत ही दानवीर प्रवृत्ति के थे, जिसलिए राजा यम अपना पूरा राज उस ब्राह्मण को खुशी-खुशी सौंप दिया और राजा यम खुशी-खुशी अपने दोनों बच्चों सरवर व नीर और अपनी पत्नी अमली को लेकर राज्य का त्याग करते हुए राज्य को छोड़कर चले गए।
शेष कल
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।


