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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 08 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 08 अप्रैल 2026

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।_
☄️ *दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। *बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_

🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 07:01 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। जिसका स्वामी गुरु (बृहस्पति) है। मूल नक्षत्र के देवता निर्ऋति (विनाश और पुनर्जन्म की देवी) माने जाते हैं।
⚜️ योग – वरीयान योग 05:10 PM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : वणिज 07:02 PM तक
द्वितीय करण – विष्टि पुरे दिन
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:55:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:22:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:33 ए एम से 05:18 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:55 ए एम से 06:03 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:42 पी एम से 07:04 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:43 पी एम से 07:51 पी एम
💧 अमृत काल : रात्रि 01:38 ए एम, अप्रैल 09 से 03:25 ए एम, अप्रैल 09
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 12:00 पी एम से 12:45 ए एम, अप्रैल 09
❄️ रवि योग : पूरे दिन
💥 भद्रा वास- पाताल 07: 01 पी एम से पूर्ण रात्रि तक
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ गण्ड मूल/ रवि योग/ विडाल योग/ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे बलिदान दिवस, वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय स्मृति दिवस, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व जन्म दिवस, भारतीय (तेलुगु) सिनेमा के अभिनेता अल्लू अर्जुन जन्म दिवस, विश्व रोमा दिवस, अंतरराष्ट्रीय रोमानी दिवस, राष्ट्रीय एम्पानाडा दिवस, राष्ट्रीय ‘सब कुछ हमारा है’ दिवस, महात्मा बुद्ध जयन्ती, मशहूर लेखक जयकांतन स्मृति दिवस, सुप्रसिद्ध कवि दिनेश कुमार शुक्ल जन्म दिवस, प्रसिद्ध उद्योगपतियों वालचंद हीराचंद स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
😎देख भाई, अगर तू घर में सिलाई मशीन रखने की सोच रहा है, तो वास्तु का चक्कर समझ ले वरना काम में बरकत नहीं होगी। सिलाई मशीन ‘धारदार’ और ‘लोहे’ की चीज़ है, इसलिए इसे कहीं भी पटक देना सही नहीं है। वास्तु के हिसाब से मशीन रखने की सबसे धाकड़ जगह उत्तर-पश्चिम कोना है, जिसे वायव्य कोण कहते हैं। इस कोने में मशीन रखने से तेरा काम बिना किसी रुकावट के सर्र-सर्र चलेगा और घर में फालतू का कलेश भी नहीं होगा। अगर वहां जगह नहीं बन रही, तो तू इसे दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण में भी सेट कर सकता है, बस ध्यान रखियो कि मशीन भारी होती है तो उसे ज़मीन पर मजबूती से टिका के रख।
एक बात और गांठ बांध ले, मशीन को कभी भी उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में भूलकर भी मत रखना, क्योंकि वो भगवान की जगह होती है और वहां लोहे-लक्कड़ का कबाड़ या सिलाई-कटाई का काम करना भारी पड़ सकता है। सिलाई करते समय अपना मुंह हमेशा पूर्व या उत्तर की तरफ रखियो, इससे दिमाग तेज़ चलेगा और सिलाई की फिनिशिंग भी एकदम झकास आएगी। और हां, काम खत्म होने के बाद मशीन को खुला मत छोड़, उस पर बढ़िया सा कवर डाल के रख ताकि उसकी निगेटिविटी बाहर न फैले और मशीन भी एकदम चकाचक रहे।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कलयुग में पांडवों का जन्म – महाभारत की गाथा के बारे में लगभग हर कोई जानता है जब पांडवों और कौरवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. जिसमें पांडव विजयी हुए थे. कहा जाता है कि महाभारत के इस विनाशकारी युद्ध के अंत में अश्वत्थामा ने आधी रात के समय पांडवों के सभी पुत्रों का वध कर दिया था.* कहा जाता है अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और वो महाभारत काल से आज तक भटक रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या कलयुग में भी पांडवों का फिर से जन्म हुआ है और अगर हुआ है तो कहां और किस रुप में हुआ है.*
दरअसल इन सभी सवालों का जवाब भविष्य पुराण में मिलता है.* 👉🏼 तो चलिए जानते हैं कि कलयुग में पांडवों का जन्म किसके घर और किस रुप में हुआ*
कलयुग में पांडवों का जन्म –शिवजी ने कहा था पांडवों का होगा कलयुग में पांडवों का जन्म* भविष्य पुराण के अनुसार महाभारत युद्ध के अंत में आधी रात के समय अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य ये तीनों पांडवों के शिविर के पास गए और उन्होंने मन ही मन भगवान शिव की आराधना की. उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पांडवों के शिविर में प्रवेश करने की आज्ञा दे दी.*
भगवान शिव से आज्ञा मिलते ही अश्वत्थामा पांडवों के शिविर में दाखिल हो गए और पांडवों के सभी पुत्रों का वध करके वहां से निकल गए.* जब पांडवों को इस पूरे घटनाक्रम के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके लिए भगवान शिव को जिम्मेदार मानते हुए उनसे युद्ध करने के लिए पहुंच गए. लेकिन जैसे ही सभी पांडव भगवान शिव से युद्ध करने के लिए उनके सामने पहुंचे तो उनके सभी अस्त्र-शस्त्र शिवजी में समा गए.*
इसके बाद भगवान शिव ने पांडवों से कहा कि तुम सभी भगवान श्रीकृष्ण के उपासक हो इसलिए इस जन्म में तुम्हें इस अपराध का फल नहीं मिलेगा, लेकिन इसका फल तुम्हें कलयुग में फिर से जन्म लेकर भोगना पड़ेगा.* श्रीकृष्ण ने बताया कौन सा पांडव कहां और किस रुप में लेगा कलयुग में पांडवों का जन्म?*
भगवान शिव की इस बात को सुनकर सभी पांडव दुखी हो गए और फिर वो सभी भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे. उन्होंने श्रीकृष्ण से अपनी सारी व्यथा बताई तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि कौन सा पांडव कलयुग में कहां और किसके घर जन्म लेगा.* भविष्य पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण ने बताया था कि कलयुग में अर्जुन का जन्म परिलोक नाम के राजा के यहां होगा और वो ब्रह्मानन्द नाम से विख्यात होंगे.*
श्रीकृष्ण ने बताया था कि कलयुग में युधिष्ठिर वत्सराज नाम के राजा के पुत्र बनेंगे और कलियुग मे उनका नाम मलखान रखा जाएगा.* भगवान श्रीकृष्ण ने भीम से कहा था कि उनका जन्म कलयुग में वीरण के नाम से होगा और वो वनरस नाम के राज्य के राजा बनेंगे.*
श्रीकृष्ण ने बताया था कि कलयुग में नकुल कान्यकुब्ज के राजा रत्नभानु के यहां पर जन्म लेंगे और उन्हें लक्षण के नाम से जाना जाएगा.* भविष्य पुराण के अनुसार कलयुग में सहदेव भीमसिंह नामक राजा के घर में जन्म लेंगे और उनका नाम होगा देवसिंह.*
श्रीकृष्ण ने बताया था कि कलयुग में धृतराष्ट्र का जन्म अजमेर में पृथ्वीराज के रूप में होगा और* द्रौपदी उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी और उनका नाम होगा वेला.*
भविष्य पुराण के अनुसार कलयुग में महादानी कर्ण का जन्म तारक नाम के राजा के रूप में होगा* महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद.
*महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद पांडवों का हस्तिनापुर में 36 सालों तक राज रहा. इसके बाद पांडवों ने द्रौपदी और एक कुत्ते के साथ अपनी अंतिम यात्रा के रूप में स्वर्ग की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया. इस यात्रा के दौरान युधिष्ठिर को छोड़कर सभी की मृत्यु हो गई. सिर्फ युधिष्ठर कुत्ते के साथ स्वर्ग के दरवाजे पर पहुंच सके. लेकिन इसके बाद भी पांडवों ने कलियुग में जन्म लिया था. *महाभारत के युद्ध के पश्चात पांडवों का राज पूरे 36 साल चला लेकिन श्राप के चलते श्री कृष्ण की द्वारका में हालात बिगड़ने लगे। हालात संभालने के लिए श्री कृष्ण अपने सारे यादव-कुल को प्रभास ले गए लेकिन वहां भी हिंसा से पीछा नहीं छूटा। स्थिति ऐसी हो गई कि पूरा यादव-कुल एक दूसरे के खून का प्यासा हो गया और अंत में आपस में लड़कर उन्होंने पूरी नस्ल का ही संहार कर डाला। इस संहार को रोकने की श्री कृष्ण ने बहुत कोशिश की लेकिन एक शिकारी ने गलती से उन्हीं पर निशाना साध दिया। भगवान श्री कृष्ण मानव-योनि में थे, उनकी मृत्यु निश्चित थी। उनके बाद, वेद व्यास ने अर्जुन से कह दिया कि अब तुम्हारे और तुम्हारे भाईयों के जीवन का उद्देश्य भी खत्म हो चुका है।
‌ *इसी समय द्वापर युग खत्म हो रहा था और कलयुग की शुरुआत होने वाली थी। अधर्म बढ़ने लगा था और यही देखते हुए युधिष्ठिर ने राजा का सिंहासन परीक्षित को सौंपा और खुद अपने चारों भाईयों और द्रौपदी के साथ हिमालय पर चले गए। हिमालय की यात्रा आसान नहीं थी और धीरे-धीरे सभी युधिष्ठिर का साथ छोड़ने लगे। सबसे पहले द्रौपदी की मृत्यु हुई और अंत में भीम का निधन हुआ। सिर्फ युधिष्ठिर ही हिमालय के पार स्वर्ग के दरवाजे तक पहुंच सके। *जब युधिष्ठिर ने हिमालय की यात्रा शुरू की तभी से यमराज कुत्ते के रूप में उनके साथ चल रहे थे। जो युधिष्ठर के साथ स्वर्ग के द्वार तक पहुंचे। स्वर्ग के दरवाजे पर यमराज कुत्ते का रूप छोड़ अपने असली रूप में आ गए और फिर उन्होंने युधिष्ठिर को सबसे पहले नरक दिखाया। वहां द्रौपदी और अपने बाकी भाइयों को देख युधिष्ठिर उदास तो हुए लेकिन फिर भगवान इंद्र के कहने पर कि अपने कर्मों की सजा भुगत वो जल्द ही स्वर्ग में दाखिल होंगे, युधिष्ठिर को चैन मिला। इस तरह द्वापर युग के अंत के साथ ही पांडवों का अंत हुआ।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।

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