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सांईखेड़ा में कंजंक्टिवाइटिस बीमारी ने पसारे पांव, आंखों की सुरक्षा का रखे ध्यान

रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सिलवानी । आंखों की इस बीमारी से लोग परेशान हो गए हैं इस बीमारी को वायरल कंजंक्टिवाइटिस या आंखें आना कहा जाता है पिछले तीन दिनों में लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं हर पांचवें व्यक्ती में यह लक्षण दिखाई दे रहा हैं आपको बता दें कि बीमारी का शिकार होने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं जिनकी उम्र 5 से 15 साल के बीच है और जिन व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उन्हें इसका खतरा अधिक होता है इसलिए बच्चों में इस बीमारी का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है अगर सही समय पर इलाज न किया जाए तो भविष्य में आंखों को क्षति पहुंचने के कारण धुंधली दृष्टि होने की संभावना रहती है। स्वास्थ्य विभाग से निवेदन है ग्राम में पहुंच कर कैंप लगाकर इलाज करने कि कृपा करें जिससे ग्रामीणों को समय पर लाभ प्राप्त हो सके।
कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी से ऐसे जुड़े थे कि अब एक नया संक्रमण ने अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है। यह संक्रमण बीमारी किसी भी युवा या फिर छोटे बच्चे में यह संक्रमण हो रहा है। ग्रामीण इलाकों की बात करें तो साईंखेड़ा में यह बदलाव तेजी से हो रहा है। यह संक्रमण आँखों में हो रहा है। जिस व्यक्ति को यह संक्रमण हो रहा है उसकी आंखें लाल हो रही हैं और आंखों में बहुत दर्द हो रहा है। साईंखेड़ा में यह संक्रमण लगभग हर घर में हो रहा है, एक परिवार में एक से दो मरीज आपको मिल जाएंगे जो इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। संक्रमण से उपकरण प्राप्त करने के लिए ग्रामीण प्रकार के घरेलू उपचार कर रहे हैं जिसमें कई लोगों ने अपनी आंखों के संक्रमण को दूर करने के लिए देशी दवाई का उपयोग कर रहे है, अब यह उपाय किया जा सकता है, हम कह नहीं सकते हैं और हम ऐसा करने की सलाह सलाह नहीं दे सकते हैं। बिना डॉक्टर के परामर्श से घरेलू उपचार खतरनाक साबित हो सकता है। संक्रमण से संक्रमण पर प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है इसलिए यह संक्रमण लगातार बढ़ रहा है।
ब्लाक मेडिकल ऑफिसर डॉ. एचएन मांडरे का कहना है कि बारिश में आंख की बीमारी बायरल संक्रमण के कारण फैलता है। आंखों को मले नही, स्वास्थ्य केन्द्र आकर ड्रॉप और दवाइयों ले। आंख की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति किसी से हाथ नही मिलाए, परिवार में कपड़े टावल अलग अलग उपयोग करे। आंखों को साफ और ठंडे पानी से साफ करे। आंख की बीमारी पीड़ित व्यक्ति आंखो मे चश्मा लगाकर रखे जिससे अन्य व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित न हो सके। और हैंडबास करे। और आंख की बीमारी से ग्रस्त बच्चों को स्कूल ना भेजें ।

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