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21 मार्च 2023 : कब है भूतड़ी अमावस्या? जानें सही तिथि और इसका महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
—-••●☆सब शिव है☆●••—-
🌚 21 मार्च 2023 : कब है भूतड़ी अमावस्या? जानें सही तिथि और इसका महत्व
प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है। पूरे वर्ष में 12 अमावस्या पड़ती हैं और सभी अमावस्या का अपना अलग मयत्व है। चैत्र अमावस्या हिंदू वर्ष का अंतिम दिन होता है। चैत्र अमावस्या को हमारे धर्म में बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। यह अमावस्या मार्च-अप्रैल के महीने में आती है। हालांकि, इस दिन का हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। इस दिन धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां की जाती हैं, जैसे स्नान, दान और सामग्री का दान। चैत्र अमावस्या को पितृ तर्पण जैसे अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है। लोग कौवे, गाय, कुत्ते और यहां तक कि गरीब लोगों को भी भोजन कराते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार अमावस्या को पूर्वज अपने वंशजों के यहां जाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। चैत्र अमावस्या व्रत हिंदू धर्म में सबसे लोकप्रिय उपवासों में से एक है। अमावस्या व्रत या उपवास सुबह शुरू होता है और प्रतिपदा को चंद्रमा के दर्शन होने तक चलता है। इसे भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। इस तिथि का महत्व बहुत अधिक माना गया है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से भूतड़ी अमावस्या की सही तिथि और इसका महत्व।
❄️ चैत्र अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त
➡️ इस साल चैत्र अमावस्या 21 मार्च 2023, मंगलवार के दिन पड़ेगी।
➡️ चैत्र अमावस्या आरंभ – 20 मार्च, रात्रि 1 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन 21 मार्च 2023 को रात्रि 10 बजकर 53 मिनट पर इसका समापन होगा।
➡️ उदया तिथि में होने की वजह से यह 21 मार्च को ही मनाई जाएगी।
⚛️ अमावस्या पर बन रहे हैं शुभ योग
चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। और इस बार मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौमवती अमावस्या भी कहलाएगी। इस दिन शुभ, शुक्ल और सिद्धि नाम के 3 शुभ योग का भी निर्माण हो रहा है जो इस तिथि का महत्व और भी बढ़ा रहे हैं।
🤷🏻‍♂️ चैत्र अमावस्या क्यों कहलाती है भूतड़ी अमावस्या?
आप सबके मन में सवाल होगा कि अमवाया तो हर महीने आती है लेकिन सिर्फ चैत्र की अमावस्या को ही भूतड़ी अमावस्या क्यों कहा जाता है। आइए आपको इसके पीछे का कारण बताते हैं। दरअसल, भूत का अर्थ है नकारात्मक शक्तियां, कुछ अतृप्त आत्माएं अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने के लिए जीवित लोगों पर अधिकार करने का प्रयास करती हैं और उग्र रूप धारण कर लेती हैं। इसी उग्रता को शांत करने के लिए नकरात्मक ऊर्जा से प्रभावित लोगों को शांत करने के लिए भूतड़ी अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान करवाया जाता है।
📜 क्या है इस तिथि का महत्व?
कोई भी अमावस्या हो, इस दिन पितरों का श्राद्धकर्म करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। चैत्र अमावस्या में भी पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष उपाय करने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चैत्र अमावस्या पर भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन से दर्द, संकट और नकारात्मकता को खत्म करने में मदद मिलती है। पुराणों में उल्लेख किया गया है कि इस शुभ दिन पर गंगा नदी में स्नान करने से आपके पापों और बुरे कर्मों का नाश होता है।अमावस्या तिथि पर भक्त अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध आदि भी करते हैं, ऐसा करने से पितृ दोष खत्म होता है।
✍🏼 भूतड़ी अमावस्या पर करें ये उपाय
🪶 भूतड़ी अमावस्या पर छोटे-छोटे उपाय करने से पितरों की कृपा हम पर बनी रहती है।
🪶 घर में पितरों की आत्मा की शांति के लिए धूप-ध्यान करें।
🪶 गाय को हरा चारा खिलाएं।
🪶 कुत्ते और कौए को रोटी खिलाएं।
🪶 संभव हो तो जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े आदि का दान करें।
🤷🏻‍♀️ चैत्र अमावस्या के दिन क्या करना शुभ होता है
♦️ चैत्र अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और इस दिन पितरों की शांति के लिए व्रत करना भी शुभ माना जाता है।
♦️ यदि इस दिन किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन कराएं तो वो भी आपके लिए फलदायी होगा।
♦️ इस दिन प्रातः जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें कौर सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पितरों का तर्पण करें।
♦️ गरीबों को उनकी जरूरत की चीजें दान करें।
♦️ इस दिन पितरों के नाम का दीपक मुख्य द्वार पर जरूर जलाएं और उनकी शांति की प्रार्थना करें।
♦️ चैत्र अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी फलदायी माना जाता है।
👉🏻 चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या क्यों कहा जाता है
▪️ हर एक महीने में पड़ने वाली अमावस्या तिथि का अपना अलग नाम है उसी प्रकार चैत्र की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या नाम दिया गया है। इस अमावस्या का भूत-प्रेतों से कोई नाता नहीं है, लेकिन मान्यता है कि इस दिन नकारत्मक शक्तियां तीव्र हो जाती हैं और नुकसान पहुंचा सकती हैं।
▪️ लेकिन यदि आप सही तरीके से पूजन करती हैं तो किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं होता है। चूंकि इस साल यह अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ेगी। इसलिए इसे भौम अमावस्या भी कहा जाएगा।
▪️ यदि आप अमावस्या तिथि के दिन पितरों का तर्पण और दान-पुण्य करती हैं तो आपके लिए विशेष रूप से फलदायी होता है।

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