Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 17 अगस्त 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 17 अगस्त 2023
17 अगस्त 2023 दिन गुरुवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि प्रतिपदा तिथि है। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण आश्लेषा नक्षत्र को छोड़कर मघा नक्षत्र में (रात्रि: 03:27 मिनट पर) चले जायेंगे। स्त्री-स्त्री., सूर्य-चन्द्र योग, जम्बुक वाहन, जल नाड़ी, तदिशों बुधः खण्ड वृष्टि योग:। आज शुक्र देवता पूर्व दिशा में (रात्रि 08:30 PM पर) उदित हो जाएंगे। आज मनसा देवी की पूजा (बंगाल-झारखण्ड का विशिष्ट पूजन) का समापन हो जायेगा। आप सभी सनातनियों को मघा नक्षत्र मे सूर्य देवता के प्रवेश होनेपर थोड़ी-बहुत वर्षा के योग की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – श्रावण मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 05:35 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मघा 07:58 PM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र के शासक देवता पितर या पूर्वज हैं।नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है।
🔕 योग – परिघ योग 07:29 PM तक, उसके बाद शिव योग
⚡ प्रथम करण : बव – 05:35 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:37:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:31:00
🎇 ब्रह्म मुहूर्त : 04:24 ए एम से 05:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:46 ए एम से 05:51 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:36 पी एम से 03:29 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:59 पी एम से 07:21 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:59 पी एम से 08:04 पी एम
💧 अमृत काल : 05:16 पी एम से 07:04 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, अगस्त 18 से 12:47 ए एम, अगस्त 18
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♂️ आज का उपाय-किसी विप्र को केसर भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल समाप्त/शुक्रोदय पूर्वे/शुभ-मांगलिक कार्य प्रारंभ/ चन्द्र दर्शन/ सूर्य मघा नक्षत्र में प्रवेश, भारतीय रिज़र्व बैंक गवर्नर वॉय. वी. रेड्डी जयन्ती, महान् क्रान्तिकारी मदन लाल ढींगरा स्मृति दिवस, फिनलैंड स्वतंत्रता दिवस, इंडोनेशिया स्वतंत्रता दिवस (हरि केमेरडेकान), साहित्य जगत् के उपन्यासकार अमृतलाल नागर जयन्ती, क्रांतिकारी पुलिन बिहारी दास पुण्यतिथि, राष्ट्रीय थ्रिफ्ट शॉप दिवस, राष्ट्रीय ब्लैक कैट प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय वेनिला कस्टर्ड दिवस
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🗽 Vastu Tips 🏯
वास्तु शास्त्र के अनुसार, छोटे आकार के मिट्टी के गमलों को लगाने के लिए घर के ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा का चुनाव करना एक बेहतर ऑप्शन है। अगर आप बिल्कुल ईशान कोण में नहीं लगा सकते हैं, तो थोड़ा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर करके भी गमले लगा सकते हैं। ये तो हुई छोटे गमलों को लगाने की बात।
वहीं बड़े और भारी मिट्टी के गमलों की बात करें, तो ये अधिकतर बड़े-बड़े बिजनेस पार्क या किसी बड़े बाग-बगीचे में देखने को मिलते हैं। इन्हें लगाने के लिए सही जगह नैऋत्य कोण, यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा है। इस दिशा में आप कितने भी भारी गमले लगा सकते हैं।
वास्तु के मुताबिक, ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा में मिट्टी के गमले लगाने से आपको जीवन में कभी अवरोध, यानि मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर फिलहाल कोई परेशानी आपके जीवन में चल भी रही है तो वो भी जल्द ही दूर हो जायेगी। साथ ही इस दिशा में मिट्टी के गमले अपने हाथों से लगाने पर या खुद से उनकी देखभाल करने पर आपके हाथ हष्ट- पुष्ट रहते हैं। इससे आपके हाथों की मजबूती बरकरार रहती है।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कहते हैं कामयाबी पाना आसान है लेकिन, उसे बनाए रखना बेहद मुश्किल है। बात अगर बीमारियों से जीत की हो तो ये फलसफा एकदम मुफीद बैठता है क्योंकि कई बीमारियां ऐसी होती है जिन पर फतह हासिल कर भी लो तो कुछ साल बाद फिर सिर उठाकर खड़ी हो जाती हैं। ऐसी ही खतरनाक बीमारियों में से एक है थायराइड कैंसर, जिसमें survival rate तो काफी ज़्यादा है। लेकिन इसके कुछ साल बाद फिर से उभर आने का खतरा भी उतना ही ज़्यादा है। ये कैंसर अगर हड्डियों में उतर जाए तो उन्हें खोखला करके छोड़ता है। वैसे हड्डियों के लिए खतरा सिर्फ थायराइड कैंसर ही नहीं, उससे पहले की स्टेज यानि थायराइड की बीमारी भी है।
दरअसल हाइपोथायराइड में मांसपेशियों की कमज़ोरी से जोड़ों में तनाव होता है और दर्द बढ़ जाता है। साथ ही ऑस्टियो आर्थराइटिस होने के चांस काफी ज़्यादा हो जाते हैं। हाइपोथायराइड से ब्लड में यूरिक एसिड भी बढ़ता है और ये भी गठिया की बीमारी को दावत देता है जबकि हाइपरथायराइड में पैराथायराइड हार्मोन कम बनता है जिससे बोन डेंसिटी घटने लगती है और गठिया का रोग लग जाता है वैसे बात सिर्फ हड्डियों की नहीं है। थायराइड डिस्टर्ब होने से पूरे शरीर पर असर पड़ता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
दांतों में ठंडा गरम लगे तो अपनाएं ये घरेलू उपचार-नारियल तेल का कुल्ला करें नारियल तेल का कुल्ला करना, दांतों में ठंडा गरम से बचा सकता है। दरअसल, नारियल तेल एंटीबैक्टीरियल है जो कि दांतों में बैक्टीरियल इंफेक्शन को कम कर सकता है और इसकी परत को अपनी नमी से बेहतर बनाता है। इससे दांत मजबूत होते हैं और इसका टैक्सचर बेहतर होता है।
शहद एक एंटीबैक्टीरियल एजेंट है जो ओरल हेल्थ को बेहतर बनाने में मददगार है। ये संवेदनशीलता के कारण होने वाले दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही ये मुंह में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है। तो, गर्म पानी लें और इसमें शहद मिलाकर कुल्ला करें। ये काम दिन में दो बार करें।
हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। दर्द को कम करने के लिए आप प्रभावित दांतों पर हल्दी की मालिश कर सकते हैं। इसके लिए आपको करना ये है कि सरसों के तेल और नमक का उपयोग करके एक पेस्ट बनाएं और दर्द को कम करने के लिए इस पेस्ट को मसूड़ों और दांतों पर दिन में दो बार लगाएं। तो, इन तमाम टिप्स की मदद से आप अपने दांतों की सेहत बेहतर बना सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हनुमान जी ने कभी भी सूर्य को नहीं निगला था। मूल वाल्मीकि रामायण में कभी ये नहीं लिखा गया कि हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। यदि किसी को ऐसा लगता है कि हनुमान जी द्वारा सूर्य को निगलने का प्रसंग रामचरितमानस का है तो वो बात भी गलत है। मानस में तो बल्कि इस बात का कोई जिक्र ही नहीं है।
हमें ये बात बता होनी चाहिए कि हनुमान जी के बाल स्वरुप का कोई भी वर्णन ना तो वाल्मीकि रामायण में है और ना ही रामचरितमानस में। ये सब सिर्फ उन मूढ़ लोगों के दिमाग की उपज है जो स्वयं को फिल्म निर्माता और निर्देशक कहते हैं और धर्म के नाम पर कुछ भी कचरा टीवी पर परोस देते हैं। कई सीरियल तो ऐसे हैं जहाँ 500 एपिसोड तक हनुमानजी बड़े ही नहीं होते, जबकि हनुमान जी का रामायण और रामचरितमानस में पहली बार वर्णन ही किष्किंधा कांड में होता है।
हनुमान और सूर्य का जो प्रसंग है वो वास्तव में वाल्मीकि रामायण में दिया गया है। रामायण के किष्किंधा कांड के सर्ग 66 में हनुमान जी के जन्म के बारे में बताया गया है। ये प्रसंग तब का है जब माता सीता की खोज में निकले वानर इस चिंता में थे कि समुद्र कौन लांघेगा। तब हनुमान जी का उत्साह बढ़ाने के लिए जांबवंत जी द्वारा उनके जन्म का वर्णन किया जाता है। पूरा बताने की आवश्यकता नहीं है अन्यथा उत्तर बहुत लम्बा हो जाएगा।
किष्किंधा कांड के सर्ग 66 के श्लोक 21, 22 और 23 से ही सारी बातें साफ़ हो जाती है। इसमें जांबवंत हनुमान से कहते हैं कि बचपन में वे सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए आसमान में उछले और 300 योजन तक पहुँच गए। तब इंद्र ने उनपर अपने वज्र से प्रहार किया। इसमें उनके द्वारा सूर्य को खाने की कोई बात ही नहीं है।
अभ्युत्थितं ततः सूर्यं बालो दृष्ट्वा महावने।
फलं चेति जिघृक्षुस्त्वमुत्प्लुत्याभ्युत्पतो दिवम् ॥२१॥
अर्थात: ‘बाल्यावस्था में एक विशाल वन के भीतर एक दिन उदित हुए सूर्य को देखकर तुमने समझा कि यह भी कोई फल है; अतः उसे लेने के लिये तुम सहसा आकाश में उछल पड़े।
शतानि त्रीणि गत्वाथ योजनानां महाकपे।
तेजसा तस्य निर्धूतो न विषादं गतस्ततः ॥२२॥
अर्थात: ‘महाकपे! तीन सौ योजन ऊँचे जाने के बाद सूर्य के तेज से आक्रान्त होने पर भी तुम्हारे मन में खेद या चिन्ता नहीं हुई।
त्वामप्युपगतं तूर्णमन्तरिक्षं महाकपे।
क्षिप्तमिन्द्रेण ते वज्रं कोपाविष्टेन तेजसा ॥२३॥
अर्थात: ‘कपिप्रवर! अन्तरिक्ष में जाकर जब तुरंत ही तुम सूर्य के पास पहुँच गये, तब इन्द्र ने कुपित होकर तुम्हारे ऊपर तेज से प्रकाशित वज्र का प्रहार किया।
तो जैसा कि आप देख सकते हैं कि यहाँ पर हनुमान जी द्वारा भगवान सूर्यनारायण को खाने का कोई भी प्रसंग नहीं है। रामचरितमानस में तो हनुमान जी के बचपन की कथा भी नहीं दी गयी है। ये कथा बता कर जांबवंत जी केवल हनुमान से इतना कह रहे हैं कि जब बचपन में तुम बात ही बात में 300 योजन ऊपर उछल गए तो अभी ये 100 योजन चौड़ा समुद्र लांघना तुम्हारे लिए कौन सी बड़ी बात है।
अब 300 योजन का मतलब है लगभग 4000 किलोमीटर। आज कल के रॉकेट इत्यादि की पहुंच तो इससे कही अधिक है, फिर महाबली हनुमान के लिए तो ये बच्चों का खेल ही तो होगा। और वही तो बताया है ग्रंथ में कि उन्होंने बचपन में खेल ही खेल में उतनी ऊंची छलांग लगा ली। फिर इसमें इतने आश्चर्य की क्या बात है।
तो फिर ये कथा जनमानस में आयी कहाँ से? वास्तव में इसका एकमात्र वर्णन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा के 18 वें दोहे में आता है। उस दोहे में तुलसीदास जी कहते हैं –
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।
इसका अर्थ ये है कि हनुमान जी ने एक हजार युग योजन पर स्थित सूर्य को मीठा फल समझ कर खा लिया था। ये दोहा भी वास्तव में एक प्रतीकात्मक दोहा है जिससे तुलसीदास जी ने उस समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी बताई थी जो आश्चर्यजनक रूप से बिलकुल सटीक है। बस यही से हनुमान जी द्वारा सूर्य को फल समझ कर खाने की बात लोक कथाओं के रूप में प्रचलित हो गयी।
कई लोग हनुमान जी द्वारा सूर्य को निगलने की घटना को ये बोल कर सच बताने का प्रयास करते हैं कि हनुमान जी के पास अष्ट सिद्धि थी जिसमें से के “गरिमा” थी जिससे वे अपना शरीर विशाल बना सकते थे। किन्तु उन लोगों को भी ये बात समझनी चाहिए कि सिद्धियों की भी एक सीमा होती है। और हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और अन्य वरदान इंद्र के प्रहार करने के बाद ब्रह्मा जी और अन्य देवताओं के वरदान से प्राप्त हुई थी जबकि ये सूर्य को निगलने वाली घटना उससे पहले की है जब उनके पास कोई सिद्धि नहीं थी। वैसे भी जब रामायण में इसका कोई वर्णन है ही नहीं तो बात ऐसे भी ख़त्म हो जाती है।
𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼🙏🏻𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼
⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।

