सागर बस आपरेटर यूनियन की मनमानी से जनता हो रही है परेशान
यूनियन को इस्तीफा देकर सागर की जनता से माफी मांगनी चाहिए
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । बस यूनियन की हठ धर्मिता के कारण आज सागर की जनता को यूनियन के स्वार्थों की सजा भुगतने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सागर बस आपरेटर यूनियन ने प्रशासन एवं जनता दोनों को बुद्धु बनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने का प्रयास किया जिसका परिणाम है कि आज असफलता हाथ लगी। यूनियन ने एक ओर हड़ताल कर जनता का समर्थन प्राप्त कर प्रशासन को सिविल लाइन मकरोनिया से ही बसे चलाने की स्वीकृति को मजबूर कर मंत्री और विधायक के बीच बैठ कर समझौता किया और दूसरी तरफ छुपे दरवाजे से हाइकोर्ट में रिट पिटीशन भी दायर कर दी यह कहा का न्याय है (हाथ जोड़ी और सीना जोरी)
ज्ञात हो यूनियन की हड़ताल के बाद और सागर के जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाओ ( पं गोपाल भार्गव के द्वारा मुख्यमंत्री को दिया पत्र, पूर्व मंत्री भूपेन्द्र भैया की आपरेटरो के बीच बैठक, विधायक शैलेन्द्र जैन और महापौर महोदया की कलेक्टर से चर्चा और अंत में जिले के मंत्री गोविन्दसिंह राजपूत और बस आपरेटरो की बैठक से मंत्री जी का समर्थन) से प्रशासन नतमस्तक हो गया और यूनियन द्वारा सिविल लाइन मकरोनिया मार्ग से ही बसो को चलाने की मांग को मानकर प्रशासन ने नये बस स्टैंड से मकरोनिया के बीच तीन बस स्टापो पर ही, बसे खड़ी होकर बसों में सवारी बैठारे और उतारे, जिससे ट्राफिक पर जाम नही लगे की शर्त पर संचालन की स्वीकृति दे दी जिससे जनता को हो रही असुविधा से मुक्ति मिल गई थी, परन्तु यूनियन के खुफिया दाव (पीठ में छुरा भौखने) से आज सागर की जनता अपने आप को ठगी ठगी सी महसूस कर रही है। अब न तो मंत्री विधायक से कह सकते और न प्रशासन से क्योंकि हाइकोर्ट से नये बस स्टैंड से संचालन की मुहर को तो यूनियन ही लगवाकर लाए है।



