पितृ पक्ष में नदी, तालाबों में विधि-विधान के साथ तर्पण करने पहुंच रहे लोग

श्राद्ध करने से पितरों को मिलती है मुक्ति, सुख-समृद्धि का देते हैं आशीर्वाद: शास्त्री
सिलवानी। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का काफी महत्व है। पितृ पक्ष में तर्पण करने के लिए इन दिनों नगर एवं आसपास के तालाबों और नदियों में तर्पण करने वाले लोग सुबह से पहुंच रहे हैं। पितृपक्ष में लोग अपने घर में श्राद्ध करने के अलावा तीर्थ स्थानों पर जाकर भी अपने पितरों का पिंडदान कर रहे हैं। नगर के लोग पंडित भूपेंद्र शास्त्री के सानिध्य में श्रीराम जानकी मंदिर जमुनियापुरा स्थित नदी में सुबह 6 बजे से तर्पण करने पहुंच रहे हैं। जहां पर विधि-विधान के साथ तर्पण कराया जा रहा है।
पंडित भूपेंद्र शास्त्री ने कहा कि पितृपक्ष में अधिकांश लोग अपने घर पर ही ब्राह्मणों को भोजन करवा कर अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं। कुछ लोग तीर्थ स्थानों पर जाकर अपने पितरों
के लिए पिंडदान करते हैं और वहां उनका श्राद्ध करते हैं। उन्होंने बताया कि पितरों का तर्पण करने से वह प्रसन्न होते हैं और अपने बच्चों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने पितरों का तर्पण अवश्य करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति पर पितृ ऋण भी होता है। इसलिए उनका तर्पण एवं पिंडदान करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि तर्पण करने के तीन साल बाद लोग गयाजी जाते हैं। श्राद्ध कर्म करने के लिए यह स्थान सबसे पवित्र माना गया है। पुराणों में यह स्थान मोक्ष की भूमि और मोक्ष स्थली कही जाती है। बताया गया है कि यहां आकर पितरों का श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।



